देश की श‍िक्षा नीति में 34 साल बाद नये बदलाव

देश की श‍िक्षा नीति में 34 साल बाद नये बदलाव किए गए हैं. बुधवार को इस नई श‍िक्षानीति को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी. नई श‍िक्षा नीति में स्कूल के बस्ते, प्री प्राइमरी क्लासेस से लेकर बोर्ड परीक्षाओं, रिपोर्ट कार्ड, यूजी एडमिशन के तरीके, एमफिल तक बहुत कुछ बदला है. यहां जानें आख‍िर न्यू एजुकेशन पॉलिसी में इतने सालों बाद क्या बदला है, इससे आपके बच्चे की पढ़ाई पर कैसा फर्क पड़ेगा.

अभी तक शादी होने या किसी के बीमार होने पर किसी की पढ़ाई बीच में छूट जाती थी. अब ये व्यवस्था है कि अगर किसी कारण से पढ़ाई बीच सेमेस्टर में छूट जाती है तो इसे मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम के तहत आपको लाभ मिलेगा. मतलब अगर आपने एक साल पढ़ाई की है तो सर्टिफिकेट, दो साल की है तो डिप्लोमा मिलेगा. तीन या चार साल के बाद डिग्री दी जाएगी.

सरकार ने तय किया है कि अब सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का कुल 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च होगा. फिलहाल भारत की जीडीपी का 4.43% हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है. वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर अब शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है. ये भी बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है.

आयोग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण पर खास जोर दिया है. जाहिर है कि एक अच्छा टीचर ही एक बेहतर स्टूडेंट तैयार करता है. इसलिए व्यापक सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और सभी शिक्षा कार्यक्रमों को विश्वविद्यालयों या कॉलेजों के स्तर पर शामिल करने की सिफारिश की गई है.

सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक हर बच्चे के लिए शिक्षा सुनिश्चित की जाए. इसके लिए एनरोलमेंट को 100 फीसदी तक लाने का लक्ष्य है. इसके अलावा स्कूली शिक्षा के निकलने के बाद हर बच्चे के पास लाइफ स्किल भी होगी. जिससे वो जिस क्षेत्र में काम शुरू करना चाहे, तो वो आसानी से कर सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *